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लेखनी कहानी -12-Jul-2022

              विषय :- ऑगन 


     बाबा मैं,  तेरे आँगन की शोभा हूँ 
     मैं तेरे आँगन में,  पली बड़ी हूँ 
   तेरे आँगन की, शोभा बनी हुई हूँ 

क्यों मैं जाऊँ, दूसरों के आँगन ।
क्यों मैं, किसी और के आँगन की शोभा बनू।।

तेरी लाज ,मुझे भी तो प्यारी है 
मैं तेरी ही तो राजकुमारी हूँ ।

तेरी ऑगन मैं सजाऊॅगी,
खुशियों से महकाऊॅगी।
खिल जाएगी सारी कलियाॅ,
जब मैं मुस्कुराऊॅगी ।।

तेरा थोड़ा सा प्यार पा के ,
खिल- खिल जाऊंगी ।
तेरे आँगन में रहकर ,
तेरी ऑगन की शोभा बढाऊगी  । ।


     🖎🖎   रबिना विश्वकर्मा 
      उ•प्र जौनपुर जिला  हथेरा 
   222128

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6 Comments

Chudhary

14-Jul-2022 10:19 PM

Nice

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Reyaan

13-Jul-2022 08:32 AM

शानदार

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Swati chourasia

13-Jul-2022 06:27 AM

बहुत खूब 👌

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